मंजिल पाने को अपनी


कि ताखीर ना कर मंजिल पाने को अपनी
फजीलत मिलेगी ,तदबीर कर जीत लाने को अपनी
लबरेज़ मेहनत से अपनी ,आब-ए-रवाँ भी रोक लगा तू
बस कयाम रहना जिंदगी मेहर-ओ-माह सी सजाने को अपनी
ताखीर -देर
फजीलत - प्रतिष्ठा
तदबीर - कोशिश
लबरेज़ - पूर्ण
आब-ए-रवाँ - बहता पानी
कयाम - ठहरे
मेहर-ओ-माह - चांद और सूरज

Swapna Sharma

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