हैप्पी विमेंस डे


फूल जैसी कोमल ही सही ,पर कांटों पर भी भारी हो 
तुम पोधा हो हर घर का ,हर पौधे की तुम  क्यारी हो
पवित्र पावन पराकाष्ठा.... तुम हो वात्सल्य सौंदर्य 
हो हर उत्सव की तुम श्रंखला ,भूल जाना ...नारी हो 

शस्त्र हो तुम खुद ही खुदका ,ना हरोगी ना ही हारी हो
विध्वंस हो तुम ही दानव का ,तुम ही सौम्य सुखकारी हो 
आकर्षण आकांक्षा आलिंगन.... का  तुम चेतन्य स्पर्श 
कभी बसंत कभी वर्षा ,कभी तुम  ग्रीष्म की दोपहरी हो
हो हर उत्सव की तुम श्रंखला ,भूल जाना ...नारी हो 

तुम दर्शन हो तुम दर्पण हो ,तुम्ही शिखर हितकारी हो 
तुम अलौकिक तुम ही वेदना, तुम ही प्रकृति सारी हो
साक्षात सात्विक समर्पण.... की तुम संपूर्ण श्रंखला
पराकाष्ठा हो हर त्याग की, फिर चाहे जो जिम्मेदारी हो 
हो हर उत्सव की तुम श्रंखला ,भूल जाना ...नारी हो 
- swapna Sharma

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