अंजानी सी इस दुनिया में तू अपना सा एक साया है
मन्नतों से तूने ही मुझे नहीं , मैंने भी तो तुझे पाया है माँ
माना की में बड़ी हो गयी, तेरे आंचल में अब नहीं समाती
पर तेरे आंचल के दूध का क़र्ज़, आज भी बकाया है माँ
मेरे सऱ पे तेरे एक हाथ ने,हर बार मुझे पार लगाया है
तेरी एक हंसी से मेरी खुशी , मैंने त्योंहार मनाया है माँ
माना की तेरी वो लोरियां,अब दे थपकी मुझे नहीं सुलाती
पर तेरे आंचल में, आज भी मेरा दुलार, उधारा है माँ
जब जब दिल दुखता है मेरा, तुझको ही मैंने पुकारा है
दुनिया के प्यार की जरूरत नहीं,तेरा ही प्यार अपारा है माँ
तू खूब खुश रहे, तू जुग जुग जिए,तेरी उम्र हो हज़ारों साल
मैं आकार तेरा,तू आधार मेरा,बस तेराही प्यार बहारा है माँ
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